हमारे बारे में
बहुराष्ट्रीय उपनिवेशवाद, आर्थिक गुलामी, जल-जंगल-जमीन पर कॉर्पोरेट कब्जे और जनसंसाधनों की लूट के खिलाफ संघर्षरत एक राष्ट्रव्यापी जनआंदोलन .
"आंदोलन क्या है?"
आज़ादी बचाओ आंदोलन बहुराष्ट्रीय उपनिवेशवाद, आर्थिक गुलामी, जल जंगल-जमीन पर कॉर्पोरेट कब्जे और जनसंसाधनों की लूट के खिलाफ संघर्षरत एक राष्ट्रव्यापी जनआंदोलन है।
आंदोलन जनसंसाधनों पर जन-अधिकार, स्वदेशी, स्वराज, सामाजिक न्याय, राष्ट्र की अखंडता और राष्ट्रीय अस्मिता की रक्षा एवं स्थापना के लिए प्रतिबद्ध है।
“देश की अस्मिता और अखंडता को समर्पित”
आंदोलन की जरुरत क्यों ?
बढ़ते खतरे को पहचानते हुए आज फिर देश को उसी तेज, उसी आक्रामकता, उसी जुझारूपन और उसी जनविद्रोही चेतना वाले आंदोलन की जरूरत है,
जो सत्ता और कॉर्पोरेट गठजोड़ को खुली चुनौती दे सके। अब समय समझौतों का नहीं, संघर्ष का है।
अब चुप्पी नहीं, प्रतिरोध चाहिए। जनता को संगठित होकर यह ऐलान करना होगा.
बढ़ती आर्थिक गुलामी, बहुराष्ट्रीय कंपनियों की बेलगाम घुसपैठ, जल-जंगल-ज़मीन और जनसंसाधनों की खुली लूट,
सांस्कृतिक आक्रमण, भूमंडलीकरण और उदारीकरण की जनविरोधी नीतियों ने जनता के अधिकारों को लगातार कमजोर किया है
“स्वदेशी ही स्वाभिमान है, स्वराज ही वास्तविक आज़ादी है।”
आज़ादी बचाओ आंदोलन ऐसे आत्मनिर्भर समाज के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है, जहाँ हर व्यक्ति को सम्मानजनक जीवन, ईमान की रोटी और सामाजिक सुरक्षा की गारंटी मिले।
आंदोलन का विश्वास है कि उदारीकरण, वैश्वीकरण और बाजारवाद के नाम पर लागू की जा रही नीतियाँ वास्तव में आर्थिक औपनिवेशीकरण का नया रूप हैं, जिनका परिणाम गरीब देशों में बेरोजगारी, भुखमरी, विस्थापन और असमानता के रूप में सामने आ रहा है।
आज़ादी बचाओ आंदोलन का उद्देश्य ऐसी वैकल्पिक व्यवस्था स्थापित करना है, जिसमें उत्पादन का आधार मुनाफा नहीं, बल्कि मानव कल्याण हो। जहाँ पूर्ण रोजगार, शोषणमुक्त संबंध, सहकारिता आधारित उत्पादन और मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति को प्राथमिकता दी जाए
“बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ भारत छोड़ो!”
हमारा विज़न ऐसी विकेंद्रित अर्थव्यवस्था का है, जिसमें उत्पादन गांव-गांव में हो, स्थानीय उद्योग और छोटे उत्पादन केंद्र मजबूत हों तथा रोजगार आधारित विकास को प्राथमिकता मिले।
हम उस व्यवस्था का विरोध करते हैं जिसमें बड़े कॉर्पोरेट उत्पादन मॉडल के कारण बेरोजगारी, विस्थापन और आर्थिक असमानता बढ़ती है।
हमारा विश्वास है कि स्वदेशी उत्पादन, सहकारिता और श्रम आधारित अर्थव्यवस्था ही वास्तविक आत्मनिर्भरता का मार्ग है।
